Tuesday, 11 December 2012

ये कैसी आज़ादी ………?


अब हमारा देश आज़ाद है , हमारा समाज तरक्की की राह में आगे बढ़ रहा है ...हमने हर क्षेत्र में विकास किया है... हमारी 

अर्थव्यवस्था बहुत आगे बढ़ रही है... दिन- प्रतिदिन एक नया बदलाव आ रहा है ...नहीं बदली है तो  एक चीज – 

मानसिकता , पैर चाँद तक पहुँच गया , दिमाग अन्तरिक्ष के चक्कर लगा रहा है ... पर नीयत...नीयत अभी भी बलात्कारी 

है , यही सच है इस प्रतिभाशाली समाज का...और इन सभ्य लोगों का ...अगर यह सच न होता तो आए दिन एक मासूम 

लड़की किसी की हैवानियत का शिकार न होती , हर औरत को बस एक ही नजर से घूरा जाता है । अपनी मेहनत और 

संघर्ष के बल पर आज नारी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है , हर क्षेत्र में उसने पुरुषों को चुनौती दी है, आज 

वह अपनी रुचि के अनुसार कार्य करने के लिए आज़ाद तो है ,पर मन ....मन अभी भी कैद में ही है । घर से निकलते 

वक्त मन में यह डर लगा रहता है कि कहाँ कोई घिनौनी हरकत न कर बैठे , बस में चढ़ते वक्त यह डर लगा रहता है कि 

कब कोई मनचला उसे पीछे से धक्का न मार दे या भीड़ की आड़ में उसका हाथ न पकड़ ले । आफिस से निकलने के 

बाद यदि 10 मिनट भी देर हो जाए तो डर लगता है कि घर में सब लोग क्या कहेंगे....? वह क्या जवाब देगी...? अगर 

कोई लड़का किसी लड़की के साथ बद्तमीजी करता है तो घर वाले भी लड़की को ही संभल कर चलने को कहते हैं ... यह 

कैसा नियम है ...? ऐसे वक्त में जब परिवार कि शख्त जरूरत होती है , किसी ऐसे की जरूरत होती है जो उसके साथ खड़ा 

हो सके ...मानसिक रूप से सहायता कर सके....सांत्वना दे सके ...उस वक्त क्या परिवार वालों को माता-पिता को यह 

सोचने की बजाय की लोग क्या कहेंगे ....अपनी लड़की को न्याय दिलाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए ... उसका 

आत्मविशवास यदि वापस लाने के बारे मन सोंचे तो लड़की के जख्म कुछ भर सकते हैं....उसे नया जीवन मिल सकता 

है...पर ऐसा नहीं होता , लोग खोखली इज्जत की आड़ में जीने के आदी  हो गए हैं .... अरे यदि वास्तव में इज्जतदार 

बनने का शौक है तो ऐसी ओछी मानसिकता वाले बिधर्मियों को सबक सीखाना पड़ेगा....जिसने गलत किया ,किसी की 

जिंदगी उजाड़ दी ...उसे कोई आंच नहीं होती , उसका कुछ नहीं बिगड़ता है ....ये कैसी आज़ादी है जो अंदर ही अंदर दम 

घोंट रही है । जिंदगी लूट जाने के बाद भी मुंह बंद रखने को कहा जाता है... छेड़-छाड़ और बलात्कार जैसे मुद्दे तो इतने 

आम हो गयें हैं कि हर गली-कूँचे और चौराहे पर दरिंदगी के नमूने आपको मिल जाएंगे । समझ में नहीं आता कि ऐसे 

वक्त में ...ऐसी वारदातों में समाज कि सुरक्षा के ठेकेदार …. कानून के रक्षक ...जो सबकी सुरक्षा कि गारंटी देते हैं , वो 

कोई ठोंस कदम क्यों नहीं उठाते...? चलिये वो नहीं कुछ कर पा रहें हैं...तो क्या हमे सब कुछ इसी तरह ...तमासबीन कि 

तरह बैठे-बैठे देखते रहना चाहिए.... और इंतज़ार करना चाहिए कोई आकर हमारी रक्षा करे...हमारे समाज कि रक्षा करे 

....कब तक हम किसी मसीहे का इंतज़ार करेंगे... हमे अपनी सुरक्षा का वीणा स्वयं ही उठाना होगामुंह घुमाकर निकलने 

कि वजाय अन्याय का मुंह तोड़ जवाब देना होगा ...और यही समय कि मांग है कि हम अपने लिए स्वयं आवाज़ उठाएँ

तभी मिल पाएगी शायद सही मैने में आज़ादी.... खुलकर जीने की  आज़ादी.... शुद्ध परिवेश में सांस लेने की आज़ादी.....

अंजलि पंडित 

आखिर कौन करेगा इस जुर्मबीज का बध......?

......जुर्मबीज...... सोंच में पड़ गए न कि ये जुर्मबीज कौन है.....? अच्छा रक्तबीज का नाम तो सुना होगा आपने

...... एक ऐसा दानव जिसकी रक्त की एक बीज यानी बूंद जमीन पर गिरते ही एक नया दानव प्रकट हो जाता

था .... उसके ही समान बलशाली और अत्याचारी.....  इस कारण उसे मारना और उसके आतंक तथा अत्याचार

को समाप्त करना असंभव सा हो गया था , देवताओं और मनुष्यों में उसके अत्याचार से त्राहि-त्राहि मची हुई थी

, तब उसके आतंक से सबको छुटकारा दिलाने के लिए माँ भगवती ने चंडी का विकराल रूप धारण किया और

रक्तबीज का विनाश करके सबको शांति और सुरक्षा प्रदान की । रक्तबीज का आतंक तो समाप्त हो गया लेकिन

आज उसका स्थान ले लिए है जुर्मबीज ने... जी हाँ जिस तरह रक्त बीज के खून की बूंद पृथ्वी पर गिरते ही

राक्षसों का जन्म होता था ठीक आज वैसी ही स्थिति जुर्म और अन्याय की है , चारो ओर इसी का बोलबाला है ,

एक जुर्म से हजारों आतंकों का जन्म हो रहा है , लोग उसके आतंक से परेशान हैं ...बड़ी ही विषम परिस्थिति है

, आखिर इस जुर्मबीज का बध कौन करेगा.......? कौन समाप्त करेगा इस दानव को........? कौन लेगा अवतार

समाज को...  राष्ट्र को इस असुर से बचाने के लिए ......? जिससे आज हर किसी का जीवन और अस्तित्व खतरे

में है । आम आदमी को अपने छोटे- छोटे कामों के लिए कितनी जद्दोजहद करनी पड़ती है ... प्रतिदिन कितने

ही जुर्मबीजों  से टकराना पड़ता है .... हर व्यक्ति प्रतिदिन यह आशा करके सोता है कि कल सब कुछ ठीक हो

जाएगा , एक दिन उसकी भी सारी उलझने समाप्त हो जाएंगी और वह चैन से जी सकेगा , लेकिन हमारे समाज

में जब-तक जुर्मबीज का साया है तब-तक शांति कैसे संभव है....? धीरे -धीरे जुर्मबीज एक विकराल रूप धारण

करता जा रहा है । कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां जुर्म न हो रहा हो .... तो क्या करें...? बैठकर यह इंतजार करें

कि कोई महापुरुष आएगा या कोई शक्ति अवतार लेगी जो जुर्मबीज का बध करके सबको भयमुक्त जीवन प्रदान

करेगी .... सबको हत्या ...बलात्कार...भृष्टाचार ...और अन्याय जैसे राक्षसों से छुटकारा मिलेगा । दो ही काम हो

सकते हैं या तो हांथ में हांथ रखकर इंतज़ार करें कि कोई मसीहा आएगा ... जादू की छड़ी घुमाएगा.... और

शांति ही शांति हो जाएगी .... सारे जुर्म, अन्याय , अत्याचार समाप्त हो जाएंगे .... या फिर उसके खिलाफ

आवाज उठाएँ ....  तो देखते हैं कैसे होगा इस जुर्मबीज का अंत ......? होगा भी या नहीं.... ? क्योंकि हम तो

चमत्कारों पर विश्वास करने वाले लोग हैं ... श्री राम ने जैसे रावण के आतंक को खत्म किया... श्री कृष्ण ने

कंस के अत्याचार का दमन किया ... तो इस  जुर्मबीज का दमन करने के लिए भी कोई न कोई अवश्य अवतार लेगा.....